उम्र से बड़ी भूख
रेलवे क्रोसिंग पर टू - व्हीलर ,ऑटो ,मिनी बस ,और कारों की
लम्बी कतार इस भीड़ से बचता - बचाता एक आठ - दस
उसकी एक ही कॉपी है...लोगों को दिखाते - दिखाते कहीं फट ना
जाये | इसी के चलते एक और खरीदना चाहती थी | मैंने पांच का नोट पकडाया तभी क्रोसिंग खुलने का
बाकि के पैसे वह रख ले और पेट भर कुछ
ना ही कोई समाचार , फिर मेरी नजर अखबार के पहले पन्ने पर
गई देखा अखबार चार दिन पुराना था |लड़का मुझे बना गया था | मै सोच में पड़ गई की भूख बड़ी थी
उसकी
साल
का लड़का मैले - कुचैले कपड़ो में अखबार बेच रहा था | डेढ़ रुपये में
न्यूज़ पेपर ....वह लहरा - लहरा कर पेपर बेच रहा था | पर काफी मशक्कत के
बाद
भी उसका एक भी पेपर नही बिका , मै गौर से उसे देख रही थी | किसी ने फिकरा कसा --- "पैदाकर के रास्ते, पर छोड़ देते हैं मरने
"
"बाबू भीख नहीं मांग रहा हूँ , अख़बार खरीद लो "
.................
" एक मुझे देना " मैंने सोचा एक और अख़बार रख लूं ,कारण कल मेरे सम्मान समारोह के फोटो आज के अखबार में छपा था पर
सायरन बजने लगा मैंने जल्दबाजी में अखबार लिया और कहा
खा
ले | क्रोसिंग खुल गई और मै अखबार ले घर आ गई | चाय का कप ले कर अखबार उठाकर
पेज पलटने लगी , देखा खबरें इसमे कुछ अलग - अलग से हैं ....... मैंने पूरा अखबार देख डाला .....मेरी फोटो कही नहीं थी
उम्र .....
...नहीं
..........
नहीं...... उम्र बड़ी थी भूख की |
---- मीता दास
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