Monday, April 18, 2016

  उम्र से बड़ी भूख  

                   रेलवे क्रोसिंग पर टू - व्हीलर ,ऑटो ,मिनी बस ,और कारों की
 
लम्बी कतार इस भीड़ से बचता - बचाता एक आठ - दस 
​साल
 का लड़का मैले - कुचैले कपड़ो में अखबार बेच रहा था | डेढ़ रुपये में 
​ ​
न्यूज़ पेपर ....वह लहरा - लहरा कर पेपर बेच रहा था | पर काफी मशक्कत के 
​बाद ​
 भी उसका एक भी पेपर नही बिका , मै गौर से उसे देख रही थी | किसी ने फिकरा कसा --- "पैदाकर के रास्ते, पर छोड़ देते हैं मरने
"  
"बाबू  भीख नहीं मांग रहा हूँ , अख़बार खरीद लो "
  ​.................
 " एक मुझे देना " मैंने सोचा एक और अख़बार रख लूं ,कारण कल मेरे सम्मान समारोह के फोटो आज के अखबार में छपा था पर
 
उसकी एक ही कॉपी है...लोगों को 
दिखाते - दिखाते कहीं फट ना
 
जाये | इसी के चलते 
एक और खरीदना चाहती  थी | मैंने पांच का नोट पकडाया तभी क्रोसिंग खुलने का 
सायरन बजने लगा मैंने 
जल्दबाजी में अखबार लिया और कहा
 
बाकि के पैसे वह रख ले और पेट भर कुछ 
 ​खा​
 ले | क्रोसिंग खुल गई
 और मै अखबार ले घर आ गई | चाय का कप ले कर अखबार उठाकर
 ​
पेज पलटने लगी , देखा खबरें इसमे कुछ 
अलग - अलग से हैं ....... मैंने पूरा अखबार देख डाला .....मेरी फोटो कही नहीं थी
 
ना ही कोई समाचार , फिर 
मेरी नजर अखबार के पहले पन्ने पर
 
गई देखा अखबार चार दिन पुराना था  |लड़का मुझे बना गया था | मै सोच में पड़ गई की भूख बड़ी थी
 
उसकी  
​उम्र .....
...नहीं
 ​ ..........
  ​
नहीं......  उम्र बड़ी थी  भूख की |
                               
                                                                                                                                                                                    ---- मीता दास 

No comments:

Post a Comment